Health class 9 chapter in Hindi notes

 12th class Notes [Part-2]

Kings And Chronicles The Mugal Courts 

शासक और इतिवृत्त:    (मुगल दरबार) 

(लगभग 16 और 17 वीं शताब्दी में  शताब्दियाँ)

मुगल दरबार कैसे होते थे?

मुगल शासक के दरबार को अस्तित्व को समाज के दिल के रूप में प्रदर्शित किया गया है।

दरबार का केंद्र बिंदु राजसिं संघ तथा तख्त होता था।

दरबारी समाज में सामाजिक नियंत्रण का व्यवहार दरबार में माननीय संबोधन शिष्टाचार तथा बोलने के ध्यानपूर्वक निर्धारित किए गए नियमों द्वारा होता था।

 शिष्टाचार का जरा सा भी उन्नत होने पर ध्यान दिया जाता था और उस व्यक्ति को तुरंत ही दंडित किया जाता था।

शब ए बारात;-शबे बरात हिजरी कैलेंडर के आठवें महीने और 14 सावन को पढ़ने वाली चंद्र पूर्ण रात होती है।

ऐसा माना जाता है कि इस रात मुसलमानों के लिए आगे आने वाले वर्ष का भाग्य निर्धारित होता है और गुनाह माफ कर दिए जाते हैं।

राजा की समय सारणी 

बादशाह अपने दिन की शुरुआत सूर्योदय के समय कुछ व्यक्तिगत धार्मिक प्रार्थना उसे करता था और इसके बाद वह पूर्व की ओर मुंह के एक छोटे छज्जे अर्थात झरोखे में आता था।

झरोखे के नीचे लोगों की भीड़ होती थी जिसमें सैनिक व्यापारी शिल्पकार किसान बीमार बच्चों के साथ औरतें थी उनका इंतजार करती थी।

झरोखे में एक घंटा बिताने के बाद बादशाह अपनी सरकार के प्राथमिक कार्य सार्वजनिक सभा भवन(दीवान-ए-आम) में आता था।

दीवाने आम में 2 घंटे में जाने के बाद बादशाह दीवान-ए-खास में सभाएं और गोपनीय मुद्दों पर चर्चा करता था।

राज्य के मंत्री उसके सामने अपनी याचिकाए प्रस्तुत करते थे और कर जो वह वसूलते थे उसका हिसाब किताब मंत्री बादशाह को देते थे।

सिंहासन रोहन की वर्षगांठ शब-ए-बरात और होली जैसे कुछ महत्वपूर्ण अवसरों पर दरबार का माहौल खुशहाल हो उठता था।

मुगल शासक वर्ष में 3 मुख्य त्योहार बनाया करते थे सूर्य वर्ष और चंद्र वर्ष के अनुसार शासक का जन्मदिन और वसंत आगमन पर पारसी नववर्ष शाही परिवारों में विवाहों का आयोजन काफी खर्चीला होता था।

शादी का प्रदर्शन दीवान-ए-आम में होता था।

जन्मदिन पर बादशाह को विभिन्न वस्तुओं से तोला जाता था और बाद में यह वस्तुएं दान में बांट दी जाती थी।


पदवियाँ ,उपहार और भेंट 

  1. राज्याभिषेक के वक्त और किसी दुश्मन को हराने के बाद मुग़ल बादशाह विशाल पदवियाँ ग्रहण करते थे। 
  2. मुग़ल सिक्को पर राजसी नयाचार के साथ शासनरत बादशाह की पूरी पदवी होती थी। 
  3. बादशाह योग्य व्यक्ति को उपाधि देते थे। 
  4. मीर खान ने अपने नाम में अलिफ़ अर्ताथ 'अ ' अक्षर लगाकर अमीर खान करने के लिए औरंगज़ेब को एक लाख रूपये दिए थे। 
  5. एक उपहार सरप्पा (' सर से पांव तक ') था। इसमें तीन हिस्से हुआ करते थे ;- जामा ,पगड़ी और पटका। 
  6. बादशाह बहुत खास मौक़े पर कमल की मंजरियों वाला रत्नजड़ित गहनों का सेट उपहार में देते थे। 


 
शाही परिवार की जानकारी 

हरम शब्द का उपयोग मुगलों की घरेलू की ओर  संकेत करने करता है। 

हरम का मतलब पवित्र स्थान है। ये शब्द फ़ारसी से निकला है। 

मुग़ल बादशाह के परिवार में उनकी पत्नियां और उपपत्नियाँ ,उनके नज़दीकी और दूर के रिश्तेदार  और गुलाम होते थे। 

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