Class 12 History Chapter 9 Notes In hindi

 Class 12 History Chapter 9 Notes 
Kings And Chronicles The Mugal Courts 
शासक और इतिवृत्तः (मुग़ल दरबार )
(लगभग सोलहवीं और सत्रहवीं शताब्दियाँ )


मुगल शासक
बाबर ;-

बाबर का शासनकाल 1526 ईस्वी से 1530 ईस्वी तक रहा।

मुगल नाम मंगोल से लिया गया था। आज या नाम साम्राज्य का एहसास कराता है।

इन शासकों ने अपने आप को तैमूरी कहा क्योंकि पिता की तरफ से व तुर्की शासक के मुंह के वंशज थे।

पहला मुगल शासक बाबर था जो माता की तरफ से चंगेज खान का संबंधी था।

बाबर तुर्क भाषा बोलता था।सोलहवीं शतब्दी से ही मुग़ल शब्द का इस्तेमाल हो रहा है ।

रडयार्ड किपलिंग  ने एक बुक लिखी थी जिसका नाम जंगल बुक था उसका नायक मोगली था।

बाबर को फरागना से उज़बेको ने भगा दिया था।

बाबर ने अपने आप को काबुल में स्थापित किया और फिर 1526 में अपने दल के सदस्यों की आवश्यकता पूरी करने के लिए क्षेत्रों और संसाधनों की खोज में वह भारतीय उपमहाद्वीप में और आगे की ओर बढ़ा।

हुमायूं ने 1555 में सूरो को हराया फिर 1साल बाद उसकी मौत हो गई।

हुमायूं की पत्नी का नाम नादिरा था।

जलालुद्दीन अकबर

अकबर का शासन काल 1556-1605 तक रहा।

अकबर 13 साल की उम्र में सम्राट बन गया था।

अकबर के बाद जहांगीर शाहजहां और औरंगजेब राजा बने।

1707 मैं औरंगजेब की मौत हो गई थीं। उसके बाद फिर राजवंश की शक्ति घटती रही।

इस राजवंश के अंतिम राजा बहादुर शाह जफर द्वितीय को अंग्रेजों ने उखाड़ फेंका था।

1857 में मुगल राजवंश का अंत हो गया था।


इतिवृत्त की जानकारी

मुगल बादशाह ने जो इतिवृत्त तैयार कर आए थे वो साम्राज्य और उसके दरबार के अध्ययन के लिए महत्वपूर्ण स्त्रोत है।

मुगल इतिवृत्तों के लेखक मुख्य रूप से दरबारी ही होते थे।

कुछ खास इतिवृत्त है जिनका नाम है अकबरनामा शाहजहांनामा आलम गिरी नामा यह संकेत करते हैं कि उनके लेखकों की नजरों  में साम्राज्य और दरबार का इतिहास और भाषा का इतिहास एक ही था।

भाषा ;-

मुगलों का इतिहास फारसी भाषा में लिखे गए थे।

मुगलों की मातृभाषा तुर्की थी।

बाबर ने अपनी कविताएं और लेख अपनी मातृभाषा तुर्की में ही लिखे थे।

अकबर ने अपनी समझ से फारसी को दरबार की प्रमुख भाषा बनाया था।

अकबरनामा मुगल इतिहास फारसी में लिखा गया था।

 बाबरनामा तुर्की भाषा से फारसी भाषा में अनुवाद किया गया था।

महाभारत और रामायण जैसे संस्कृत ग्रंथों को फारसी में अनुवाद किया गया।

महाभारत का नाम रज्म़नामा (युद्ध की पुस्तक) रखा गया था।


पांडुलिपियों की रचना

मुगल साम्राज्य की सभी पुस्तकें पांडुलिपि के रूप में थी यानी वह हाथों से लिखी हुई थी।

मुगलों की पांडुलिपियों का संग्रह जहां किया जाता था उसे पुस्तकालय या किताबखाना कहा जाता था।

जिन्होंने वास्तविक में पांडुलिपियों की रचना की थी उन्हें पद लिया और पुरस्कार भी मिले थे।

अकबरनामा और बादशाहनामा क्या था?

अकबरनामा और बादशाहनामा को मुगल इतिहास में सबसे महत्वपूर्ण माना जाता है।

हर एक पांडुलिपि में 150 पूरे तथा दोहरे पननो पर लड़ाई,घेराबंदी, शिकार, इमारत निर्माण और दरबारी दृश्य आदि के चित्र है।

 अबुल फज़ल का पालन पोषण मुगल राजधानी आगरा में हुआ था।

अबुल फजल के अंदर बहुत सारे गुण थे जिनकी वजह से बादशाह अकबर उनसे बहुत प्रभावित हुआ था।

1589 से अबुल फजल ने अकबरनामा पर 13 वर्षों तक काम किया।

अकबरनामा इतिहास घटनाओं के वास्तविक विवरणों,शासकीय दस्तावेजों तथा जानकार व्यक्तियों के मौखिक प्रमाणों पर आधारित है।

अकबरनामा को तीन जिल्दो में विभाजित किया गया है। पहले दो इतिहास है तीसरी जिल्द आईने अकबरी की है।

अबुल फजल का शिष्य अब्दुल हमीद लाहौरी बादशाहनामा के लेखक माने जाते हैं।

पाठशाला में की भी तीन जिल्दे थी। यह भी एक सरकारी इतिहास है।

बुढ़ापे की वजह से लाहौरी तीसरे दशक के बारे में ना लिख सका जिसे बाद में इतिहासकार वारिस ने लिखा था।

अकबरनामा का अंग्रेजी में अनुवाद हेंनरी बेवरिज ने किया था।

बादशाहनामा का कुछ हिस्सा ही अंग्रेजी में अनुवाद किया गया है।

सुल्ह-ए-कुल की नीति क्या थी?

सुलह ए नीति की एक शर्त थी कि वे राज्य सत्ता को क्षति नहीं पहुंचाएंगे और आपस में नहीं लड़ेंगे।

सुलह ए कुल का आदर्श राज्य नीतियों के जरिए लागू किया गया था।

अकबर ने 1563‌ में तीर्थ यात्रा कर और 1564 में जज़िया कर को खत्म कर दिया।

साम्राज्य के अधिकारियों को प्रशासन में सुलह ए कुल के नियम का अनुपालन करने के लिए निर्देश भी दिए गए।

औरंगजेब के शासनकाल में गैर मुसलमान प्रजा पर जजिया कर फिर से लगा दिया गया था।

राजधानियां और दरबार

मुगल साम्राज्य का दिल उसकी राजधानी नगर था जहां दरबार लगता था।

16वीं और 17वीं शताब्दी के दौरान मुगलों की राजधानियां बड़ी तेजी से बदलने लगी।

1560 में अकबर ने आगरा के किले का निर्माण करवाया था।

इस किले को लाल बलुआ पत्थर से बनाया गया था।

1570 के दशक में अकबर ने फतेहपुर सिकरी में एक नई राजधानी बनाने का निर्णय लिया था।

अकबर ने फतेहपुर सीकरी को राजधानी बनाने का निर्णय इसलिए लिया होगा क्योंकि सीकरी को जाने वाली सीधी सड़क पर स्थित था जहां शेख मोइनुद्दीन चिश्ती की दरगाह उस समय तक एक महत्वपूर्ण तीर्थ स्थल बन चुकी थी।

1648 में दरबार सेना व राज्य खानदान आगरा से नई निर्मित शाही राजधानी शाहजहानाबाद चले गए।

दिल्ली के प्राचीन नगर में जामा मस्जिद चांदनी चौक के बाजार की वृक्ष विधि और अभिजात वर्ग के बड़े-बड़े घर थे।


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