Class 12th history chapter 10
Notes in Hindi
Colonialism And The Countryside
उपनिवेशवाद और देहात
सरकारी अभिलेखों का अध्ययन
इसमें हम पढ़ेंगे औपनिवेशिक शासन का मतलब उन लोगों के लिए क्या होता था जो देहात में रहते थे। और बंगाल के जमींदारों बारे में उन राजमहल की पहाड़ियों की यात्रा जहां पहाड़ियां और संथाल लोग रहते थे और फिर वहां के दक्कन की ओर आगे के बारे में जानेंगे। ईस्ट इंडिया के लोगों ने कैसे गांव में राज्य स्थापित किया।
बंगाल और वहाँ के ज़मींदार
- औपनिवेशिक शासन पहली बार बंगाल में स्थापित किया गया था। बंगाल में ही सबसे पहले भूमि अधिकारों की नई व्यवस्था और एक नई राजस्व प्रणाली स्थापित की गयी थी।
- सन 1797 बर्दवान मैं नीलामी की गयी थी। ये एक बड़ी घटना थी। बर्दवान का राजा महाल (भूसम्पदाएँ) बेच रहा था।
- इस्तमरारी बंदोबस्त सन 1793 में लागू किया गया। ईस्ट इंडिया कंपनी ने tex की राशि निश्चित कर दिया था।
- बर्दवान की ज़मीने अठारहवीं सदी तक बेच दी गयी थी।
- 1770 के दशक तक बंगाल के ग्रामीण अर्थव्यवस्था पर बहुत संकट आ गया था। खेती की पैदावार खत्म हो रही थी। अकाल पड़ गया था।
- ज़मींदारो के नीचे बहुत सरे गांव होते थे। कंपनी के हिसाब से एक ज़मींदार के हिस्से में आने वाले गांव राजस्व लेते थे।
राजस्व राशि के भुगतान में ज़मींदार क्यों चूक रहे थे ?
- कम्पनी ये सोच रही थी कि राजस्व निर्धारित कर देने से ज़मींदारो में सुरक्षा बढ़ेगी लेकिन ज़मींदार इस्तमरारी बंदोबस्त के बाद राजस्व मांग को अदा करने में चूक रहे थे।
- ताल्लुकदार ;- इसका मतलब है वह इंसान जिसके साथ ताल्लुक यानि संबंध हो।
- ज़मींदारों की असफलता का कारण ;-
- प्रारंभिक मांगे बहुत ज़्यादा थी क्योकि ऐसा महसूस किया जा रहा था कि यदि मांग को आने वाले सम्पूर्ण समय के लिए निर्धारित किया जा रहा है तो आगे कीमतों में बढ़ोतरी होने और खेती का विस्तार होने से आय में वृद्धि होने पर भी कंपनी उस वृद्धि में अपने हिस्से का दावा कभी नहीं कर सकेगी।
- 1790 के दशक में ऊँची मांग लागु की गयी थी। इसी समय कृषि की उपज की कीमते घट रही थी जिससे रैयत के लिए ,ज़मींदार को उनकी देय राशियाँ चुकाना मुश्किल था।
- राजस्व असमान था था,चाहे फसल अच्छी हो या ख़राब राजस्व को ठीक समय पर ही देना पड़ता था।
- इस्तमरारी बंदोबस्त ने पहले ही ज़मींदार की शक्ति को रैयत से राजस्व इकट्ठा करने और अपनी ज़मींदारी का प्रबंध करने तक ही सिमित क्र दिया था।
- अठारहवीं सदी के अंत तक ज़मींदार बहुत संकट में आ गए थे। और धनी किसान गावों में अपनी स्थिति मज़बूत कर रहे थे।
- गावों में जोतदार की शक्ति ज़मीनदारों की शक्ति से ज़्यादा प्रभावशाली होती थी।
- ज़मींदार कम्पनी को राजस्व देते थे। गांव का सारे छोटे बड़े किसान ज़मींदार को लगान अदा करते थे।
रैयत ;- इस शब्द का इस्तेमाल अंग्रेज़ो ने किसानो के लिए किया था।
पाँचवीं रिपोर्ट क्या थी ?
- पाँचवीं रिपोर्ट संसद में सन 1813 में पेश की गयी थी। यह पाँचवीं रिपोर्ट थी जो भारत में ईस्ट इंडिया कम्पनी के प्रशासन तथा क्रियाकलाप के विषय में तैयार की गयी थी।
- यह रिपोर्ट 1,002 पृष्ठो में तैयार की गयी थी।
- पांचवी रिपोर्ट एक ऐसी रिपोर्ट है जो एक प्रवर समिति द्वारा तैयार की गई थी यह रिपोर्ट भारत में ईस्ट इंडिया कंपनी के शासन के स्वरूप पर ब्रिटिश संसद में गंभीर वाद विवाद का आधार बनी थी।
- राजस्व समय पर नहीं वसूल किया जाता था और काफी हद तक जमीने नीलामी और बेचने के लिए रखी जाती थी।
बेनामी;-इसका अर्थ है गुमनाम।
लठियाल ;- इसका अर्थ है वह व्यक्ति जिसके पास लाठिया डंडा हो यह जमींदार के लठे्त यानी डंडेबाज़ पक्षधर होते थे।
- बुकानन एक चिकित्सक था जो भारत आया और बंगाल चिकित्सा सेवा में कार्य किया।
- बुकानन ने 1794 से 1815तक कार्य किया था।
- कुछ सालों तक बुकानन भारत के गवर्नर जनरल लॉर्ड वेलेजली का चिकित्सक रहा।
- बुकानन ने कोलकाता में एक चिड़ियाघर की स्थापना की जो कोलकाता अलीपुर चिड़ियाघर कहलाया।
- बुकानन जहां भी गया वहां उसने निवासियों के व्यवहार को शत्रुता पूर्ण पाया।
संथाल 1780 के दशक में बंगाल में आने लगे थे।
पहाड़िया लोग जंगल काटने के लिए हम को हाथ लगाने को तैयार नहीं थे और अब भी उपद्रवी व्यवहार करते थे।
संस्थानों को समीना देकर राजमहल की तलहटी में बसने के लिए तैयार कर लिया गया।
1832 में जमीन के एक बड़े इलाके को दामिन-इ-कोह के रूप में सीमांकित कर दिया गया इसे संस्थानों की भूमि घोषित कर दिया गया।
इसके बाद संस्थानों की बस्तियां बड़ी तेजी से बढ़ी संतानों के गांव की संख्या जो 1838 में 40 थी तेजी से बढ़ कर 1851तक 1,473 तक पहुंच गई।
सिंधु मांझी संथाल विद्रोह का नेता था।
संथाल विद्रोह शुरू कर दिया था।
जब विद्रोह फैला तो ब्रिटिश अधिकारियों की आंखों के सामने एटीन फिफ्टी सेवन का गदर दृश्य आ गया था।
गांव में विद्रोही किसानों के पुलिस थाने स्थापित किए गए। और सेना बुलाई गई।
95 व्यक्तियों को गिरफ्तार कर लिया गया और कुछ व्यक्तियों को दंडित भी किया गया।
साहूकार :- साहूकार एक ऐसा व्यक्ति होता था जो पैसा उधार देता था और साथ ही व्यापार भी करता था।
नई राजस्व प्रणाली
- जैसे-जैसे ब्रिटिश शासन बंगाल से भारत के दूसरे भागों में फैलता गया वहां भी राजस्व की नई प्रणाली लागू कर दी गई।
- 1810 के बाद खेती की कीमतें बढ़ गई जिससे उपज के मूल्य में वृद्धि हुई और बंगाल के जमींदारों को आमदनी में इजाफा होने लगा।
- राजस्व की मांग इस्तमरारी बंदोबस्त के तहत तय की गई थी।
- 1820 तक इंग्लैंड में डेविड रिकार्डो एक जाने-माने अर्थशास्त्री के रूप में विख्यात थे।
- किरायाजीवी ;-यह शब्द ऐसे लोगों के लिए इस्तेमाल किया जाता है जो अपनी संपत्ति के किराए की आय पर जीवन बिताते हैं।
- हर 30 साल के बाद जमीनों का दोबारा से सर्वेक्षण किया जाता था और राजस्व किधर तदनुसार बढ़ा दी जाती थी इसलिए राजस्व की मांग अब चिरस्थाई नहीं रही थी।
- मित्रों जब दक्कन में फैला तो प्रारंभ में मुंबई की सरकार उसे गंभीरता पूर्वक लेने को तैयार नहीं थी।
- 1857याद से परेशान थी भारत सरकार ने मुंबई की सरकार पर दबाव डाला कि वह दंगों के कारणों की छानबीन करने के लिए एक जांच आयोग करें।
- 1878 में रिपोर्ट आयोग ने तैयार की और पार्लियामेंट में पेश की गई।
Important dates (महत्वपूर्ण दिनांक)
1765 में इंग्लिश ईस्ट इंडिया कंपनी ने बंगाल की दीवानी प्राप्त की थी।
1773 में ईस्ट इंडिया कंपनी के क्रियाकलापों को विनियमित करने के लिए ब्रिटिश पार्लियामेंट द्वारा रेग्युलेटिंग एक्ट पारित किया गया।
1793 में बंगाल में इस्तमरारी बंदोबस्त शुरू हुआ।
1800 हमें संथाल लोग राजमहल की पहाड़ियों में आने जाने लगे और वहां बसने लगे थे।
1818 में मुंबई दक्कन में पहला राजस्व बंदोबस्त हुआ।
1820 में कृषि कीमतें गिरने लगी।
1855 से 56तक संथालों की बगावत हुई।
1861 में कपास में तेजी का समारंभ हुआ।
1875 में दक्कन के गांव में रैयतों ने बगावत की।
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