Class 12 history notes in hindi [Chapter -1]

 Class 12 History Notes In Hindi

Chapter-1 [Bricks, Beads and Bones The Harappan Civilisation] [Part -1]

ईंटें,मनके तथा अस्थियाँ हड़प्पा सभ्यता 

हड़प्पा की जानकारी ;-

हड़प्पाई मुहर हड़प्पा और सिंधु घाटी सभ्यता की सबसे विशिष्ट पूरावस्तु 
है। सेलखड़ी पथ्थर से बनाई गयी मुहरों पर जानवरो के चित्र तथा एक ऐसी लिपि के चिह्न थे जिन्हे अभी तक पढ़ा नहीं गया। 
उस समय के लोगो के बारे हमे उनके द्वारा पीछे छोड़ी गयी वस्तुओ -जैसे उनके रहने की जगह ,मृदभांडो ,आभूषणों ,औज़ारो और मुहरों से भी इनके बारे में जानकारी मिली है। 
सिंधी घाटी सभ्यता को भी हड़प्पा संस्कृति कहा जाता है। 
हड़प्पा का नाम जहां ये सभ्यता खोजी गयी थी उसके नाम पर पड़ा था। 
इस सभ्यता को विकसित हड़प्पा भी कहा जाता है। 
हड़प्पा से पहले भी कई संस्कृतियां अस्तित्व में थी। 
हड़प्पा की बस्तियां छोटी होती थी। हड़प्पा सभ्यता के रहने वाले लोग पेड़ -पौधो ,जानवरो तथा मछली से भोजन प्राप्त करते थे। 
हड़प्पा सभ्यता से मिले उत्पाद गेहूं ,जौ ,दाल ,सफ़ेद चना और तिल शामिल है। गुजरात से बाजरे के दाने प्राप्त हुए है। चावल हड़प्पा में कम मात्रा में पाए गए है। 
हड़प्पा सभ्यता से मिली जानवरो की हड्डियां भेड़ ,बकरी ,भैंस और सूअर की हड्डिया भी शामिल है। ये सारे जानवर पालतू थे। 
मछली और पक्षियों की हड्डियां भी मिली है। 
हड़प्पा क्षेत्र अर्ध -शुष्क क्षेत्रों में था जहां खेती करने के लिए सिचाईं की ज़रुरत पड़ती थी। 
अफगानिस्तान में शुतोगोईनामक हड़प्पा सभ्यता से नेहरू के कुछ अवशेष मिले है लेकिन पंजाब और सिंध में नहीं मिले है। 

अंग्रेज़ी में बी.सी. हिंदी में ई.पू.का मतलब ' बिफोर क्राइस्ट 'ईसापूर्व  है। 
  

मोहनजोदड़ो की विशेषताएँ 

मोहनजोदड़ो एक सबसे प्रसिद्ध पुरास्थल है। 
हड़प्पा सबसे पहले खोजा गया था। 
मोहनजोदड़ो दो हिस्सों में बटाँ हुआ था। 
इनको दुर्ग और निचला शहर का नाम दिया गया था। 
दुर्ग ऊंचाई पर था क्योकि इसकी संरचनाएँ कच्ची ईटों के चबूतरे पर बनी थी। दुर्ग को दिवार से घेरा गया था। 
निचला शहर भी दिवार से घेरा गया था। 
सड़को और नालियों को एक ' ग्रिड ' प्रद्धति में बनाया गया था और ये एक दूसरे को समकोण पर कटती थी। 
 निचला शहर आवासीय भवनों का उदहारण देता है। 
मोहनजोदड़ो में कुओं की संख्या लगभग 700 थी। 
दुर्ग में संरचनाओं के ऐसे साक्ष्य मिलते हिअ जिनका इस्तेमाल विशिष्ट सार्वजनिक प्रयोजनों के लिए किया जाता था। 
दुर्ग में विशाल स्नानागार था जिसमें जलाशय भी था। 
जलाशय चारो ओर से एक गलियारे से घिरा हुआ था। 


शवाधान [Burials] कैसे थे ;-

हड़प्पा में मिले शवाधान में मृतकों (मुर्दो) को गर्तो में दफनाया गया था। 
गर्तो की बनावट अलग अलग होती थी। 
कुछ जगहों पर गर्तो पर चिनाई की गयी थी। 
कुछ कब्रों में आभूषण भी मिले है। 
1980 के दशक में एक कब्र में पुरुष की खोपड़ी के पास शंख के तीन छल्लो ,जैस्पर के मनके और सेकड़ो की संख्या में सूक्ष्म मनको से बना एक आभूषण मिला था। 
कहीं पर मृतकों को ताँबे के दर्पणो के साथ दफनाया जाता था। 







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