Class 12 History notes in hindi (chapter-3)

Class 12 History notes in hindi

Chapter-3 Kingship cast and class

बंधुत्व ,जाति तथा वर्ग 


आरंभिक समाज (लगभग 600 ई.पू. से  600 ईसवी )

महाभारत का समालोचन 

1919 में संस्कृत विद्वान वी. एस. सुकठणकर के नृतत्व एक परियोजना की शुरुआत हुई। बहुत सारे विद्वानों ने मिलकर महाभारत का समालोचन करने का ज़िम्मा लिया था।
 महाभारत की संस्कृत पाण्डुलिपियों को इक्कट्ठा किया। विद्वानों ने पांडुलुपियों में श्लोको को ढूंढने का तरीका निकाल लिया था। 
आखिर में विद्वानों ने श्लोको का चयन किया जो लगभग सभी पाण्डुलियों में पाए गए थे। उनका प्रकाशन 13,000 
पृष्ठों में ग्रन्थ खंडो में किया। इस को पूरा करने के लिए सैंतालीस साल लगे। 

बंधुता एवं विवाह 

आपने देखा होगा कि सबके परिवार अलग अलग होते है उनके रिश्तेदार भी  अलग अलग होते है। 
कई परिवारों में लोग आपस में मिलजुल कर काम करते है और भोजन भी मिलकर करते है। 
हम सम्बन्धियों को जाती समूह भी कह सकते है। 

पितृवंशिकता ;- वह वंश परम्परा जो पिता के पुत्र फिर पौत्र ,प्रपौत्र आदि से चलती है। 
मातृवंशिकाता ;- जहां वंश परम्परा माँ से जुडी हुई है। 

विवाह के नियम 

पितृवंश को आगे बढ़ाने के लिए पुत्र महत्वपुर्ण थे। लड़कियों को अलग तरह से देखा जाता था। 
बहिर्विवाह ;- अपने गोत्र से बाहर विवाह करने को ही बहिर्विवाह कहा जाता है। 
अंतर्विवाह ;- वैवाहिक सम्बन्ध समूह के मध्य ही होते हैं। यह समूह एक जाती या फिर एक जगह रहने वाले लोगो का हो सकता है। 
बहुपत्नी प्रथा ;- एक पुरुष की अनेक पत्नियां होती है। 
बहुपति प्रथा ;- एक महिला के एक से ज़्यादा पति होते है। 

ब्रह्म्मण बहुधा ऋग्वेद के पुरुषसुक्त मंत्र को बताते थे जो आदिमानव पुरुष की बली का चित्रण है।
ब्रह्म्मण कहते हैं कि संसार के सभी पुरुष के शरीर से निकले थे।
ब्रह्ममण पुरुष का मुंह है ,उसकी भुजा से क्षत्रिय निर्मित हुआ है।
वैश्य उसकी जांघ से ,और पैर से शूद्र उत्पन्न हुआ है।
ब्राह्मण का कार्य; 
  1. वेदों की शिक्षा 
  2. यज्ञ करना और करवाना 
  3. दान देना और लेना 
शत्रियो का कार्य ;
  1. युद्ध करना 
  2. लोगो को सुरक्षा देना 
  3. न्याय करना 
  4. वेद पढ़ना 
  5. यज्ञ करवाना 
  6. दान देना 
वैश्यों का कार्य ;
  1. खेती करना 
  2. गौ पालन करना 
  3. व्यापार करना 
शूद्र का कार्य ;
  1. इन तीनों वर्गों की सेवा करना था 




Imortant dates [महत्वपूर्ण दिनाँक]

पुस्तकें प्रकाशित हुई ;-
  1. 500 ई.पू.;- पणिनि की अष्टाध्यायी ,संस्कृत व्याकरण प्रकाशित हुई। 
  2. 500-200 ई.पू. ;- प्रमुख धर्मसूत्र (संस्कृत में)
  3. 500-100 ई.पू. ;- आरंभिक बौद्ध ग्रंथ त्रिपिटक सहित (पाली में)
  4. 500-400 ई.पू. ;- रामायण और महाभारत (संस्कृत में )
  5. 200 ई.पू.-200 ईस्वी ;- मनुस्मृति (संस्कृत में) ,तमिल संगम साहित्य की रचना और संकलन हुआ। 
  

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