Class 11 History notes in hindi
Chapter - 6 [ The Three Orders] [तीन वर्ग ]
इस Chapter हम नौवीं और सोलहवीं सदी के मध्य पश्चिमी यूरोप में होने वाले सामाजिक ,आर्थिक एवं राजनितिक परिवर्तनों के बारे में देखेंगे।
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# सामंतवाद का परिचय
सामंतवाद शब्द का प्रयोग मध्यकालीन यूरोप के आर्थिक ,विधिक ,राजनितिक और सामाजिक संबंधों का वर्णन करने के लिए किया जाता है।
ये शब्द जर्मन भाषा फ्यूड से बना है जिसका अर्थ है ' भूमि का टुकड़ा है'।
सामंतवाद एक तरह के कृषि उत्पादन को इंगित करता है जो सामंत और कृषको के सबंध पर आधारित है।
फ़्रांस और इंग्लैंड
गॉल ;- ये रोमन साम्राज्य का एक प्रान्त था।
जर्मनी की एक जनजाति ,फ्रैंक ने अपना नाम देकर उसे फ़्रांस बना दिया।
एक संकरे जलमार्ग के पार स्थित इंग्लैण्ड - स्कॉटलैंड द्वीपों को ग्यारहवीं सदी में फ़्रांस के एक प्रान्त नार्मंडी (Normandy) के राजकुमार द्वारा जीत लिया गया था।
तीन वर्ग
समाज मुख्य रूप से तीन वर्ग में बन गया;- पादरी ,अभिजात और कृषक।
दूसरा वर्ग -अभिजात वर्ग की विशेषता
पादरियों ने खुद को प्रथम वर्ग में रखा था और अभिजात वर्ग को दूसरे वर्ग में रखा था।
लेकिन वास्तव में अभिजात वर्ग की भूमिका ज़्यादा थी।
बड़े भूस्वामी और अभिजात लोग राजा के अधीन होते थे। और कृषि लोग भूस्वामी के अधीन होते थे।
अभिजात वर्ग का अपनी सम्पदा पर पूर्ण नियंत्रण था।
वे अपना खुदका न्यायालय बना सकते थे और यहां तक की अपनी मुद्रा भी प्रचलित कर सकते थे।
अभिजात वर्ग का घर 'मेनर ' कहलाता था।
मेनर की जागीर
- लार्ड का अपना मेनर -भवन होता था।
- कुछ लार्ड गाँवो के मालिक थे।
- जगीरो की भूमि में वन होते जहां लार्ड शिकार करते थे।
- मेनर कभी भी आत्मनिर्भर नहीं हो सकते थे क्योकि उन्हें नमक ,धातु के बर्तन बाहर के स्त्रोतों से प्राप्त करने होते थे।
# नाइट ;- कुशल अश्वसेना की आवश्यकता होने के कारण नाइट वर्ग बना।
प्रथम वर्ग पादरी ;-
कैथोलिक चर्च के अपने नियम थे।
पादरी वर्ग एक शक्तिशाली संस्था थी।
ये राजा पर निर्भर नहीं थे।
कोई भी आसानी से पादरी नहीं बन सकता था। स्त्री ,दास और कृषक ये लोग पादरी नहीं बन सकते थे।
जो पुरुष पादरी बनता था वो शादी नहीं कर सकता था।
टीथ (Tithe) ;- चर्च को एक साल में किसानो से उसकी उपज का दसवां हिस्सा लेने का अधिकार था जिसे टीथ कहते थे।
भिक्षु
भिक्षु अपना सारा जीवन ओबे में रहने और समय प्राथना करने ,अध्ययन और कृषि जैसे शारीरिक श्रम में लगाने का व्रत लेता था।
भिक्षु की ज़िन्दगी पादरी से बिलकुल अलग थी।
भिक्षु की ज़िन्दगी पुरुष और महिला दोनों अपना सकते थे।
तीसरा वर्ग -किसान ,स्वतन्त्र और बंधक
स्वतन्त्र कृषक अपनी भूमि को लार्ड के काश्तकार के रूप में देखते है।
किसानो के परिवार को लार्ड की जागीरों में काम करना पड़ता था।
इस श्रम से होने वाला उत्पादन जिसे ' श्रम - अधिकांश 'कहते थे।
Important dates [ महत्वपूर्ण दिनाँक ]
- 481 ;- क्लोविस फ्रेंक लोगो का राजा बना।
- 496 ;- क्लोविस और फ्रेंक लोगो ने धर्म परिवर्तन करके ईसाई बने।
- 1066 ;- नॉरमन लोगो की एंग्लो -सैक्सनी लोगो को हरा कर इंग्लैण्ड पर विजय प्राप्त की।
- 1315 -17 ;- यूरोप में महान आकाल।
- 1347-50 ब्यूबोनिक प्लेग।
- 1381 ;- कृषको के विद्रोह।
- 1461 -1556 ;- फ़्रांस में नए शासक।
- 1485 -1547 ;- इंग्लैंड में नए शासक।
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